Ek Khoj Par Nikala Hun Mai Lyrics in Hindi

Ek Khoj Par Nikala Hun Mai Lyrics in Hindi

इक खोज पर निकला हूँ मैं 

उसको खोजने निकला हूँ 

हे ओ कहाँ ? क्या पता ? क्या पता ?

हे अन्तर्यामी तुम्हे खोजने

निकला हूँ मैं ,निकला हूँ मैं 

 

है राह कठिन, है राह कठिन 

तुम्हे ढूंढना ही जटिल

पर उसको पा कर रहूंगा मैं

ब्रह्मांड के सच को पाऊंगा में

 

ना ख्वाब है ना ख्वाहिशें

सिर्फ तलाश से सच की 

सच का दीवाना बनके

दुनिया तलाशने चला हूँ मैं

 

है इक आग तेरे इस दिल में

साहस है तेरी जिस्म में

मंजिल को तू पाएगा 

तपसकर है दुनिया वासी

अपने आप को खोज सन्यासी

ब्रह्माण्ड के सच को पाएगा तू

इक सच के अटूट प्रियसी 

Nikhil Niranjan Pradip

Nikhil Niranjan Pradip

ऋषि वही ब्रह्मज्ञान सिवाय और कुछ लिखता ही नहीं गुरु वही ब्रह्मचैतन्य सिवाय और कुछ दिखाता ही नहीं प्रेम वहीं जहां प्रीतम के सिवाय और कुछ दिखता नहीं भक्ति वहीं जहां भगवान सिवाय और कुछ दिखता नहीं .....साधक सच्ची वही... लक्ष्य जिसकी सर्वज्ञ चैतन्य सिवाय कुछ भी नहीं... जय गुरुदेव...! जय गुरुदेव...!! जय गुरुदेव...!!!

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